रिपोर्ट -सोनू उनियाल
उत्तराखंड के प्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद अब इस दुनिया में नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद देहरादून के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वहीं सीएम धामी ने भी उनके निधन पर दुख जताया है।
- अब नहीं रहे उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक हास्य कलाकार घन्ना भाई ।
- उत्तराखंड रंगमंच के मझे हुए कलाकार थे घन्ना भाई।
- घनानंद का जन्म 1953 में पौड़ी के गगोड़ गांव में हुआ।
- उनकी शिक्षा कैंट बोर्ड लैंसडाउन जिला पौड़ी गढ़वाल से हुई।
- घन्ना भाई ने हास्य कलाकार के रूप में अपने सफर की शुरुआत 1970 में रामलीलाओं में नाटकों से किया।
- 1974 में घनानंद ने रेडियो और बाद में दूरदर्शन पर कई कार्यक्रम भी दिए।
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद ‘घन्ना भाई’ जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर, दिवंगत आत्मा को श्री चरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों व समर्थकों को यह असीम कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करें।
आपकी सरलता, मृदुता और अद्वितीय अभिनय शैली ने लोगों को न केवल… pic.twitter.com/BO2iv30Dna
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) February 11, 2025
सीएम धामी ने जताया दुख
सीएम धामी ने पोस्ट करते हुए कहा कि उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध हास्य कलाकार घनानंद ‘घन्ना भाई’ जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर, दिवंगत आत्मा को श्री चरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों व समर्थकों को यह असीम कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करें। सीएम धामी ने कहा कि आपकी सरलता, मृदुता और अद्वितीय अभिनय शैली ने लोगों को न केवल हंसाया, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का नजरिया दिया। उत्तराखण्ड के फिल्म जगत और अभिनय के क्षेत्र में आपके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। आप सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।
हास्य कलाकार से किया सफर शुरू
बता दें कि उत्तराखंड के मशहूर हास्य कलाकार घनानंद का जन्म साल 1953 में पौड़ी के गगोड़ गांव में हुआ था ।घनानंद की कैंट बोर्ड लैंसडाउन जिला पौड़ी शिक्षा दीक्षा गढ़वाल हुई। उन्होंने साल 1970 में रामलीलाओं में हास्य कलाकार के रूप में सफर शुरू किया। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड की कई फिल्मों में भी काम किया है। जिसमें घरजवैं, चक्रचाल, बेटी-ब्वारी, जीतू बगडवाल, सतमंगल्या, ब्वारी हो त यनि, घन्ना भाई एमबीबीएस, घन्ना गिरगिट और यमराज प्रमुख हैं।
राजनीति में भी किस्मत आजमाई
घनानंद साल 1974 में रेडियो और बाद में दूरदर्शन में भी कई कार्यक्रम किए। यही नहीं उन्होंने राजनीति में भी किस्मत आजमाई और साल 2012 विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर पौड़ी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरे। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद वो चुनाव में भाजपा के लिए स्टार प्रचारक की भूमिका में उतरते रहे हैं।