Uttarkashi Disaster: धराली में नहीं हुआ था लैंडस्लाइड, वैज्ञानिकों ने बताई इसकी असली वजह…

Uttarkashi Disaster: 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा का निरीक्षण करने के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से CBRI के वैज्ञानिकों सहित पाँच सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। यह सभी जियोलॉजिस्टिक वैज्ञानिक थे।

धराली में लैंडस्लाइड नहीं हुआ 

निरीक्षण के बाद CBRI के वैज्ञानिक ने बताया कि धराली में लैंडस्लाइड नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि लैंडस्लाइड होता तो बड़ी संख्या में पेड़-पौधे भी बहकर आते, लेकिन इस आपदा में ऐसा कुछ नहीं देखने को मिला। आपदा वाले दिन क्षेत्र में 50 से 60 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।वैज्ञानिकों का अनुमान है कि उस समय बारिश और बर्फ का पानी एक साथ आने से यह घटना हुई। इसलिए इस आपदा को क्लाउडबर्स्ट इंड्यूस्ड एवरेज स्नो या ग्लेशियल फ्लूवियल डिब्रिस फ्लो का नाम दिया जाएगा।

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वैज्ञानिकों ने कहा कि पहाड़ों में भवन निर्माण करते समय फाउंडेशन को बेहद मजबूत बनाया जाना चाहिए। साथ ही भवन की ऊँचाई पर विशेष ध्यान दिया जाए और केवल 2 से 3 मंज़िला भवन ही बनाए जाएँ। भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले स्ट्रक्चर मैटीरियल की गुणवत्ता भी बेहतर होनी चाहिए ताकि आपदा के समय नुकसान को कम किया जा सके।

उन्होंने अपील की कि पहाड़ों में खासतौर पर बरसाती नालों और गदेरे के आसपास निर्माण कार्य से बचा जाए, क्योंकि आपदा कभी भी आ सकती है और बचाव ही सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। वैज्ञानिकों ने बताया कि धराली आपदा निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही उत्तराखंड स्टेट डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को सौंपी जाएगी।