रिपोर्ट – सुरजीत सिंह बिष्ट
Holi Milan: राजधानी देहरादून के संस्कृति विभाग ऑडिटोरियम 1 मार्च को किसी पहाड़ी गांव के चौक जैसा नज़र आ रहा था। मौका था नंदा सेवा समिति के द्वितीय होली मिलन समारोह का। यहाँ केवल अबीर-गुलाल नहीं उड़ा, बल्कि यहाँ उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपरा और अपनी मिट्टी के प्रति प्रवासियों का अटूट प्रेम भी देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ बेहद आध्यात्मिक रहा। ढोल सागर के ज्ञाता श्री हरीश भारती जी ने जब अपनी कला और ‘धुयांल’ की गूँज से ऑडिटोरियम को गुंजायमान किया, तो मानो पूरा वातावरण नंदाकिनी घाटी की वादियों में तब्दील हो गया। इसके बाद महिलाओं ने मांगल गीतों के साथ देवताओं का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम का सबसे भावुक और गौरवशाली क्षण था ‘माँ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा’ की भव्य झांकी। प्रवासियों के लिए यह अपनी आराध्य देवी के साक्षात् दर्शन जैसा था। नंदाकिनी घाटी से आए कलाकारों ने जब अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं, तो लोग अपनी कुर्सियों से उठकर झूमने लगे।
पहाड़ी संस्कृति की पहचान झुमेला और चाचरी नृत्य ने समां बांध दिया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों (पिछौड़ा और नथ) में सजकर जिस तरह से लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी, वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक था।
कार्यक्रम में युवा कलाकार साहिल बिष्ट की एंट्री ने चार चाँद लगा दिए। उनकी ज़बरदस्त परफॉर्मेंस ने हॉल में मौजूद हर उम्र के व्यक्ति को थिरकने पर मजबूर कर दिया।

समारोह में चमोली के जिला पंचायत अध्यक्ष श्री दौलत सिंह बिष्ट मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
उनके साथ ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जगत की बड़ी हस्तियां भी मंच पर मौजूद रहीं, जिनमें शामिल थे:
डॉ. रमेश पांडे जी (धर्माधिकारी, ज्योर्तिमठ)
डॉ. शंभू प्रसाद पांडे जी
श्री हरीश भारती जी (ढोल सागर ज्ञाता)

अतिथियों ने समिति के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि शहरों की भागदौड़ के बीच अपनी संस्कृति को संजोना एक बड़ी चुनौती है, जिसे नंदा सेवा समिति बखूबी निभा रही है।
देहरादून में हुए इस भव्य आयोजन ने यह साबित कर दिया कि पहाड़ के लोग अपनी जड़ों से कितने मज़बूती से जुड़े हैं। नंदा सेवा समिति का यह दूसरा होली मिलन समारोह न केवल मनोरंजन, बल्कि अपनी विरासत को बचाने का एक संकल्प भी था।
