Uttarakhand: आगामी बजट की तैयारी के बीच उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष आर्थिक सर्वेक्षण को अधिक पेशेवर और व्यापक बनाने के लिए नई पहल की है। नियोजन विभाग द्वारा हर साल कराए जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण को इस बार बाहरी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है, ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति का अधिक सटीक आकलन किया जा सके और बजट निर्माण के लिए स्पष्ट दिशा मिल सके।
GSDP में डेढ़ गुना से ज्यादा का उछाल
प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹ 3,81,889 करोड़ रहा, जो वर्ष 2021-22 में 2.54 लाख करोड़ रुपए थी। 2021-22 के मुकाबले GSDP में डेढ़ गुना से ज्यादा का उछाल आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय ₹1,94,670 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 2,73,921 हो गई। इस वर्ष यह सर्वेक्षण National Council of Applied Economic Research (NCEAR) के साथ मिलकर तैयार किया गया है।
बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण किसी भी वित्तीय वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का समग्र आकलन प्रस्तुत करता है। इसके आधार पर सरकार यह तय करती है कि आने वाले बजट में किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना है और विकास की दिशा क्या होगी। उन्होंने कहा कि पिछले साल से आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख संकेतकों को साझा करने के लिए बजट से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की परंपरा शुरू की गई है, जैसा कि केंद्र सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा किया जाता है
उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण एक संयुक्त प्रयास के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें एनसीएईआर और राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की टीम ने मिलकर काम किया है। सर्वेक्षण में राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास दर, विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों और चुनौतियों से जुड़े प्रमुख आंकड़े शामिल किए गए हैं। प्रमुख सचिव ने बताया कि सर्वेक्षण की प्रमुख निष्कर्षों और आंकड़ों को सार्वजनिक किया जा रहा है, जिससे सरकार की नीतियों और बजट की प्राथमिकताओं को समझने में मदद मिलेगी। यह दस्तावेज वित्त विभाग के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है और आने वाले बजट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में ग्रोथ रेट 7.23 प्रतिशत रहा है। Multidimensional Poverty Index (MPI) वर्ष 2021-22 में 9.7 प्रतिशत था जो वर्ष 2024-25 में घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है। Labour Force Participation Rate (LFPR) वर्ष 2021-22 में 60.1 प्रतिशत था, वर्ष 2024-25 में 64.4 प्रतिशत है तथा यह रोजगार के क्षेत्र में 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
राज्य में वर्ष 2021-22 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) की कुल संख्या 59,798 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 79,394 हो गई है। MSME के अंतर्गत रोजगार पाने वालों की संख्या वर्ष 2022 में 3,43,922 थी जो वर्ष 2025 में बढ़कर 4,56,605 हो गई है। इसके साथ राज्य में वर्ष 2017 तक स्टार्टअप की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2021-22 में 702 हुई और वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,750 हो गई है।
राज्य में वर्ष 2022 तक 2 हेलीपोर्ट थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 7 हो गए। हेलीपैड की संख्या वर्ष 2021-22 में 60 थी जो वर्ष 2024-25 में 118 हो गई है।
राज्य में शासकीय एवं अशासकीय डिग्री कॉलेजों की संख्या वर्ष 2021-22 में 124 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 139 हो गई है। इसके साथ इजीनियरिंग कॉलेज (गवर्नमेंट एवं प्राइवेट) की संख्या वर्ष 2021-22 में 20 थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 52 हो गई है।
राज्य में वर्ष 2021-22 में कुल 5,157 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन होता था, वर्ष 2024-25 में यह उत्पादन बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है। सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में राज्य में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। वर्ष 2021-22 में सौर ऊर्जा के माध्यम से 439 मेगावाट उत्पादन होता था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 1027 मेगावाट हो गया है।
राज्य में शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) वर्ष 2021-22 में 22 था, जो 2024-25 में घटकर 20 पर आ गई है। इसके साथ मातृ मृत्यु दर वर्ष 2021-22 में 103 थी, जो 2024-25 में घटकर 91 पर आ गई है।
राज्य में वर्ष 2021-22 में 97 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा थी जो अब शतप्रतिशत हो गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में धान और गेहूं उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2021-22 में मेडिसनल एंड एरोमेटिक प्लांट का उत्पादन क्षेत्र कुल 900 हेक्टेअर था, जो 2024-25 में बढ़कर 10 हजार हेक्टेअर पहुंच गया है।
राज्य में वर्ष 2021-22 तक 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। वहीं मत्स्य उत्पादन वर्ष 2021-22 में कुल 7,325 टन प्रति साल होता था, जो 2024-25 में बढ़कर 10,487 टन प्रति साल हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्ष 2021-22 में 8,225 होटल थे जो 2024-25 में बढ़कर 10 509 हो गए हैं। वहीं राज्य में वर्ष 2021- 22 में 3 935 होमस्टे थे, जिनकी संख्या 2024-25 में बढ़कर 6,161 पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि SDG Index में वर्ष 2021-22 में राज्य ने चौथा स्थान प्राप्त किया था, वहीं वर्ष 2023-24 में उत्तराखण्ड SDG Index की रैंक में प्रथम स्थान पर रहा। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की GSDP 8.2 प्रतिशत अनुमानित है।
