Chamoli जिला अस्पताल में संजीवनी का काम कर रहा है डॉ. दीपक नेगी का परिवार

रिपोर्ट – सुरजीत सिंह बिष्ट 

Chamoli: जहाँ एक ओर पहाड़ों की दुर्गम परिस्थितियों और सुविधाओं के अभाव का हवाला देकर स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारी और डॉक्टर्स मैदानी शहरों जैसे देहरादून और ऋषिकेश में पोस्टिंग के लिए सिफारिशें लगाते थकते नहीं हैं, वहीं सीमांत जनपद चमोली से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो पूरे प्रदेश के लिए मिसाल है।

यह कहानी है जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के वरिष्ठ सर्जन *डॉ. दीपक नेगी* की। डॉ. नेगी पिछले कई वर्षों से लगातार चमोली की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में डटे हुए हैं। जब रसूखदार लोग पहाड़ों से दूरी बनाने का बहाना ढूंढते हैं, डॉ. नेगी यहाँ के हज़ारों मरीजों के लिए *’संजीवनी* ‘ बनकर उभरे हैं। अपने अब तक के करियर में उन्होंने अनगिनत सफल ऑपरेशन कर लोगों को नया जीवन दिया है।

उनकी इसी कर्मठता और पहाड़ के प्रति प्रेम को देखते हुए आज एक सामाजिक एक संस्था ने अस्पताल पहुँचकर उन्हें सम्मानित किया। लेकिन डॉ. नेगी की कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। *इस ‘मिशन सेवा’ में वे अकेले नहीं हैं।*

हैरानी और गर्व की बात यह है कि डॉ. दीपक नेगी की धर्मपत्नी और उनके पिताजी भी इसी जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जहाँ लोग परिवार समेत शहरों में बसने का सपना देखते हैं, वहीं नेगी परिवार ने सीमांत जनपद के लोगों के दुख-दर्द को अपना समझकर सेवा का संकल्प लिया है।

“आज के दौर में जब ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ पहाड़ के काम नहीं आने की बात कही जाती है, तब डॉ. दीपक नेगी जैसे लोग इस धारणा को गलत साबित कर रहे हैं। इनके लिए अस्पताल केवल ड्यूटी का स्थान नहीं, बल्कि वह मंदिर है जहाँ ये निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा कर रहे हैं।”