Dehradun: बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे और धन से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं एडवोकेट संदीप मोहन चमोली ने कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और उत्तराखंड की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका इस प्रकरण में पाई जाती है, तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाना चाहिए और उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। किसी भी दोषी को उसके पद या प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
कहा कि वर्तमान में गठित जांच समिति में यदि मंदिर समिति से जुड़े अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं, तो इससे निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक प्रश्न उठते हैं। ऐसे में केवल विभागीय जांच से जनता का विश्वास बहाल होना कठिन होगा। इसलिए इस पूरे प्रकरण की जांच माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त अथवा वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में, अथवा किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि सत्य सामने आए और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिल सके।
चमोली ने कहा कि यह भी आवश्यक है कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और प्रदेशवासियों का विश्वास पुनः स्थापित हो सके। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी धार्मिक आस्था, पारदर्शिता और ईमानदार व्यवस्था से है। यदि इस प्रकार के मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे पूरे देश में राज्य की छवि धूमिल होगी।
कांग्रेस ने सरकार से चार प्रमुख मांगें रखीं—
1. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. जांच की निगरानी माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाए।
3. दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. जांच रिपोर्ट एवं कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
संदीप मोहन चमोली ने कहा कि देवभूमि की आस्था से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड की जनता और करोड़ों श्रद्धालु सत्य एवं न्याय की अपेक्षा रखते हैं। जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसे कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए।
