Dehradun: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए), देहरादून में प्रशिक्षणरत वर्ष 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में संपन्न हुआ। समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और सफल परिवीक्षार्थियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें देश की प्रतिष्ठित वन अकादमी से तकनीकी, नेतृत्व और प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब ये अधिकारी अपने सेवा जीवन के सर्वोत्तम दौर में होंगे, तब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा होगा और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अधिकारियों के सामने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर चुनौतियां होंगी। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नवाचार और जनभागीदारी को समान महत्व देना होगा। उन्होंने अधिकारियों से मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करने और समाज व प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने की अपील की।
समारोह में आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने निदेशक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह संस्थान वर्ष 1938 से देश की वन सेवाओं के लिए उत्कृष्ट अधिकारियों का प्रशिक्षण कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षीय अध्ययन के साथ-साथ वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, उन्नत प्रौद्योगिकी और नेतृत्व विकास पर विशेष बल दिया गया। कुल प्रशिक्षण अवधि का लगभग 45 प्रतिशत भाग क्षेत्रीय अभ्यासों, अध्ययन भ्रमणों और साहसिक गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया।
दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न पुरस्कार और पदक प्रदान किए गए। राजस्थान संवर्ग की प्रतीक्षा नानासाहेब काले वर्ष 2024 बैच की टॉपर रहीं।
