Chamoli: मां नंदा के मंच का राजनीतिकरण— आखिर आस्था के मंच पर राजनीति क्यों?, उक्रांद ने किया रोष प्रकट

Chamoli: मां नंदा की पवित्र यात्रा उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे पावन मंच को राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर रखा जाना चाहिए। लेकिन यदि किसी क्षेत्रीय दल के युवा अध्यक्ष को मंच पर अपने विचार रखने का अवसर केवल उनकी राजनीतिक पहचान के कारण नहीं दिया गया, तो यह निश्चित रूप से गंभीर और खेदजनक विषय है।

दरअसल, मां नंदा धाम कुरुड़ में आयोजित तीन दिवसीय मेले के दूसरे दिन मंच को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने सवाल खड़े किए हैं। उक्रांद के केंद्रीय प्रवक्ता एवं थराली विधानसभा क्षेत्र से इंजीनियर अंकेश भंडारी ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय दल के युवा अध्यक्ष आशीष नेगी को उचित मंच उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने इसे मां नंदा के पवित्र मंच का खुले तौर पर राजनीतिकरण बताते हुए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

अंकेश भंडारी ने कहा कि मेला समिति और संबंधित जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या मां नंदा का मंच किसी एक राजनीतिक दल की जागीर है? यदि मंच पर सभी विचारों और जनप्रतिनिधियों के लिए स्थान है, तो फिर उक्रांद के युवा नेतृत्व से परहेज क्यों? और यदि राजनीतिक भाषणों की अनुमति नहीं है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

 

आगामी चुनावों के मद्देनजर यदि किसी दल को उक्रांद की बढ़ती सक्रियता और क्षेत्रीय मुद्दों पर उसकी मुखर आवाज से राजनीतिक चुनौती महसूस हो रही है, तो उसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच दिया जाना चाहिए, न कि आस्था के मंच पर किसी की आवाज रोककर।

 

उन्होंने कहा कि मां नंदा की धरती पर विचारों को दबाने की राजनीति नहीं, विचारों का सम्मान होना चाहिए। उक्रांद किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और क्षेत्रीय अधिकारों की आवाज है। मंच देना या न देना किसी दल की ताकत का प्रमाण नहीं होता—जनता के बीच खड़े होकर जनता की आवाज सुनना ही असली लोकतांत्रिक ताकत है।

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उन्होंने कहा कि उक्रांद के सम्मान और क्षेत्रीय स्वाभिमान के साथ किया गया कोई भी अन्याय उत्तराखंड की जनता के बीच जरूर सवाल बनेगा।