Dehradun: अंकिता भंडारी प्रकरण…चार साल बाद भी सवाल कायम हैं, जवाब कब मिलेगा?

Dehradun: देहरादून स्थित CBI कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर एडवोकेट संदीप मोहन चमोली ने अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच को लेकर गंभीर सवालों पर अधिकारियों से जवाब मांगा।

उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करते हुए चार वर्ष बीत चुके हैं। इसके बावजूद इस प्रकरण में कथित VIP के नाम और भूमिका से जुड़े सवाल आज भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं। दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है? यदि किसी व्यक्ति का नाम या भूमिका इस मामले से जोड़कर लगातार सामने लाई जा रही है, तो जांच एजेंसी ने अब तक उस व्यक्ति से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच किस स्तर तक की है—यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

अंकिता की माताजी द्वारा VIP को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए जाने के बाद भी इस पहलू की जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
जिस व्यक्ति का नाम लिया जा रहा है, यदि उसके संबंध में जांच योग्य कोई तथ्य या साक्ष्य सामने आया है, तो उसे जांच के दायरे में लाने की प्रक्रिया क्या है? और यदि जांच में ऐसा कोई आधार नहीं मिला है, तो CBI को इसकी स्थिति भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।

कहा कि हमारा सवाल किसी व्यक्ति को बिना जांच के दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि हर संभावित पहलू की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच का है।

उन्होंने कहा कि जनता यह भी जानना चाहती है कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक पहुंच रखने वाले व्यक्ति के कारण जांच के किसी पहलू पर पर्दा तो नहीं पड़ा? क्या भाजपा के बड़े नेताओं से जुड़े सवालों की भी उसी निष्पक्षता से जांच की जाएगी, जिस निष्पक्षता की उम्मीद आम जनता करती है? इसका जवाब जांच एजेंसी को देना चाहिए।

CBI कार्यालय में अधिकारियों से जानकारी लेने पर बताया गया कि इस मामले की जांच दिल्ली स्थित CBI कार्यालय से हो रही है। इसलिए अब अगला पड़ाव दिल्ली CBI कार्यालय होगा।यह संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय और जनता के सवालों के जवाब के लिए है। न्याय अगर अधूरा हो, तो उसे न्याय नहीं कहते।
अंकिता को न्याय मिलने तक सवाल भी जारी रहेंगे और संघर्ष भी।