Chamoli: गृह मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर मोहन सिंह बिष्ट ने नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में की सहभागिता, होमकुंड पहुंचकर की पूजा-अर्चना

Chamoli। उत्तराखंड की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी प्रसिद्ध नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने महत्वपूर्ण पड़ाव होमकुंड में विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सिद्धपीठ नंदाधाम कुरूड से 5 सितंबर को शुरू हुई यह यात्रा विभिन्न धार्मिक एवं पारंपरिक पड़ावों से होते हुए 20 सितंबर को होमकुंड पहुंची। यहां मां नंदा देवी की विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद परंपरा के अनुसार चौसिंग्या खाड़ू को कैलाश की ओर विदा किया गया।

इस ऐतिहासिक यात्रा में भारत सरकार के गृह मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत मोहन सिंह बिष्ट ने भी सहभागिता की। उन्होंने यात्रा के विभिन्न चरणों में शामिल होते हुए होमकुंड पहुंचकर मां नंदा देवी की पूजा-अर्चना की और माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से देवडोलियां शामिल हुईं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, केरल, असम, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में पहुंचे।

होमकुंड में यात्रा के अंतिम धार्मिक पड़ाव के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। श्रद्धालुओं ने मां नंदा देवी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर अपनी आस्था प्रकट की और इस ऐतिहासिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के साक्षी बने।

चौसिंग्या खाड़ू को कैलाश के लिए किया गया विदा

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा की धार्मिक परंपराओं में चौसिंग्या खाड़ू का विशेष महत्व है। होमकुंड में पूजा-अर्चना के बाद परंपरा के अनुसार चौसिंग्या खाड़ू को कैलाश की ओर विदा किया गया। इसी के साथ यात्रा का यह महत्वपूर्ण धार्मिक चरण संपन्न हुआ।

मोहन सिंह बिष्ट ने किया श्रद्धालुओं से आग्रह

इस अवसर पर गृह मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर मोहन सिंह बिष्ट ने देश-दुनिया के श्रद्धालुओं से नंदा देवी की इस पवित्र धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने का अवसर भी है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे आने वाले समय में नंदा देवी की इस पवित्र यात्रा में सहभागी बनें, मां नंदा देवी के दर्शन करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही उत्तराखंड की सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अपनी सहभागिता निभाएं।

आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा उत्तराखंड की उन प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल है, जिसमें श्रद्धालु कठिन पहाड़ी मार्गों और विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए मां नंदा देवी की आराधना करते हैं। यात्रा में शामिल देवडोलियां, स्थानीय परंपराएं, धार्मिक अनुष्ठान और हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता इसे विशेष बनाती है।

नंदाधाम कुरूड से प्रारंभ होकर होमकुंड तक पहुंची इस यात्रा में उत्तराखंड के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आस्था, संस्कृति और परंपरा के इस अद्भुत संगम को जीवंत बनाया।

 

होमकुंड में पूजा-अर्चना के बाद चौसिंग्या खाड़ू को कैलाश के लिए विदा किए जाने के साथ नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का यह महत्वपूर्ण चरण संपन्न हुआ।