Chamoli: कर्णप्रयाग–नैनीसैंण मोटर मार्ग पर खाई में मिला लापता पुलिसकर्मी बिरेन्द्र सिंह नेगी का शव, कपीरी पट्टी में शोक की लहर

Chamoli: 24 अक्टूबर से लापता थे बिरेन्द्र सिंह, विधानसभा सत्र में लगी थी ड्यूटी; घटनास्थल पर ढहे पुश्ते और चेतावनी संकेतकों की कमी को लेकर उठ रहे सवाल, आखिर सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?


उत्तराखंड के चमोली जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। चमोली पुलिस में अनुचर के पद पर तैनात बिरेन्द्र सिंह नेगी का शव कर्णप्रयाग–नैनीसैंण मोटर मार्ग पर खाई में मिला। वह 24 अक्टूबर से लापता थे। उनकी ड्यूटी गैरसैंण विधानसभा सत्र में लगी हुई थी। उनके लापता होने के बाद से परिजन और परिचित उनकी तलाश को लेकर चिंतित थे, लेकिन खाई में शव मिलने की खबर से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

 

बिरेन्द्र सिंह के निधन से उनके गांव बणसोली और पूरे कपीरी पट्टी में गम का माहौल है। एक ओर परिवार अपने प्रियजन को खोने के दुख से गुजर रहा है, तो दूसरी ओर इस घटना के बाद कर्णप्रयाग–नैनीसैंण मोटर मार्ग की स्थिति और वहां मौजूद सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

घटनास्थल के पास पुश्ता ढहा हुआ था और वहां वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए चेतावनी संकेतक भी नहीं लगाए गए थे। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सड़क पर पुश्ता क्षतिग्रस्त था, तो वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

क्या संबंधित विभाग को इस क्षतिग्रस्त पुश्ते की जानकारी थी, यदि जानकारी थी, तो समय रहते मरम्मत या सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए और यदि मरम्मत तत्काल संभव नहीं थी, तो क्या वहां चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने चाहिए थे।

 

आखिर कब तक पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठते रहेंगे और सबसे बड़ा सवाल—क्या किसी बड़ी घटना के बाद ही व्यवस्था की खामियों पर ध्यान दिया जाएगा, या समय रहते कदम उठाकर ऐसी घटनाओं का जोखिम कम किया जाएगा।