Champawat: पशुपालकों की प्रमुख लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से आक्रोश, 10 अक्टूबर के बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Champawat: उत्तराखंड में पशुपालकों ने अपनी लंबित मांगों पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई है। पशुपालकों का कहना है कि मुख्यमंत्री को 11 सितंबर को प्रार्थना-पत्र भेजने और शासन-प्रशासन के स्तर पर कई बार वार्ता करने के बावजूद अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।

पशुपालकों ने कहा कि 18 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी चम्पावत के साथ हुई बैठक में उनकी मांगों को शासन स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद 12 अक्टूबर को दुग्ध संघ चम्पावत (आंचल) में भी बैठक हुई। पशुपालकों का कहना है कि इस बैठक में 25 से 30 दिन के भीतर कार्रवाई का भरोसा देते हुए आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

 ये हैं पशुपालकों की पांच प्रमुख मांगें

1. ब्लॉक स्तर पे पशु आहार, साइलेज, भूसे की पर्याप्त व्यवस्था और पूर्व की भाँति साइलेज के मूल्य में 80% सब्सिडी और पशु आहार, भूसे पे 60% की सब्सिडी ।

2. दुग्ध समिति सचिव का मानदेय 50 पैसे प्रति किलो से बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किलो किया जाए।

3. वर्तमान 34-36 रुपये प्रति लीटर दुग्ध मूल्य को हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरला, गोवा की तर्ज पर 60 रुपये किया जाए।

4. किसी भी कारण से पशु की मृत्यु होने पर मुआवजा अविलंब समय पर दिया जाए। 

5. ⁠पशु चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता व पशु बीमा सरकार की तरफ़ से मुफ़्त किया जाये। 

 प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

पशुपालकों ने कहा कि कर्नाटक, केरल, गोवा और हिमाचल प्रदेश में दूध के मूल्य में बढ़ोतरी की गई है, जबकि उत्तराखंड में उनकी मांगें लंबित हैं। उनका कहना है कि जिला संगठन से लेकर पशुपालन मंत्री और विभागीय अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

अब पशुपालकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि 10 अक्टूबर के बाद प्रदेशभर के पशुपालक एक स्थान पर बैठक कर आंदोलन की आगामी रणनीति तय करेंगे। मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में बड़े स्तर पर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

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