Uttarakhand: ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दिसंबर 2028 से पहले पूरा करने की तैयारी में जुट गया है। सोमवार को आरवीएनएल के नव नियुक्त चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) सलीम अहमद परियोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे और देवप्रयाग तक निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण भी करेंगे।
करीब 126 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण 16,216 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस परियोजना का कार्य वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। पहले इसे वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बाद में इसकी समयसीमा बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दी गई।
आरवीएनएल के नए सीएमडी सलीम अहमद पदभार संभालने के बाद पहली बार ऋषिकेश पहुंचकर पूरी योजना की समीक्षा करेंगे। बैठक में अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों की प्रगति, चुनौतियों और तय समय से पहले परियोजना को पूरा करने की संभावनाओं पर मंथन किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत कुल 13 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। वर्तमान में बीरभद्र और योगनगरी ऋषिकेश स्टेशन से ट्रेनों का संचालन हो रहा है, जबकि शिवपुरी और ब्यासी स्टेशन पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।
इसके अलावा देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, तिलनी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशनों के निर्माण के लिए तकनीकी एवं वित्तीय टेंडर खोले जा चुके हैं।
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आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने बताया कि निर्धारित समयसीमा से पहले परियोजना को पूरा करने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
डंपिंग ग्राउंड बनेंगे हरित क्षेत्र
परियोजना के तहत उपयोग में लाए गए डंपिंग ग्राउंड को हरित पट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा। ऋषिकेश और मलेथा में वन वाटिका और पार्क बनाए जाएंगे। मलेथा में बनने वाले पार्क का नाम वीर शिरोमणि माधो सिंह भंडारी के नाम पर रखा जाएगा।
इन पार्कों में स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए जॉगिंग ट्रैक और ओपन स्पेस विकसित किए जाएंगे। भूमि अधिग्रहण के दौरान काटे गए करीब 14 हजार पेड़ों के बदले दोगुने से अधिक पौधों के रोपण के लिए आरवीएनएल ने पहले ही कैंपा फंड में राशि जमा करा दी है।
ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के पास बनने वाली वन वाटिका में वट, पीपल सहित 100 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। परियोजना के अंतर्गत सभी डंपिंग स्थलों को चरणबद्ध तरीके से स्थानीय जलवायु के अनुकूल हरित क्षेत्रों में बदला जाएगा।
आरवीएनएल अधिकारियों का कहना है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना निगम की प्राथमिकता है।
