अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई व्यापारिक साझेदार देशों पर “पारस्परिक टैरिफ” (Reciprocal Tariffs) लगाने का ऐलान किया है। भारत से आयात होने वाले सभी सामान पर 26% का एकसमान शुल्क लगाया जाएगा, जबकि चीन जैसे देशों पर यह दर 34% तक पहुंच सकती है। इस फैसले से भारत के आईटी, टेक्सटाइल, कृषि और ऑटो सेक्टर को नुकसान होने की आशंका है, लेकिन चीन की तुलना में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर बनी रह सकती है।
किन भारतीय उद्योगों पर मंडरा रहा खतरा?
- टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल: इन क्षेत्रों पर टैरिफ सबसे अधिक बढ़ा है, जिससे अमेरिका में भारतीय उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी और निर्यात प्रभावित हो सकता है।
- आईटी सेक्टर: सेवा निर्यात में मामूली कमी आने की संभावना है।
- कृषि उत्पाद: चावल जैसे उत्पादों पर 27% टैरिफ से अमेरिकी बाजार में कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन चीन के मुकाबले भारतीय सामान सस्ता रहने से फायदा मिल सकता है।
शेयर बाजार पर क्यों नहीं दिखा बड़ा असर?
केडिया सिक्योरिटीज के अजय केडिया के अनुसार, बाजार ने इस फैसले को पहले ही “डिस्काउंट” कर दिया था, क्योंकि ट्रंप की टैरिफ नीति पहले से ही स्पष्ट थी। साथ ही, भारत-अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की संभावना ने निवेशकों को आश्वस्त किया। हालांकि, द्विपक्षीय वार्ता का परिणाम भविष्य के लिए अहम होगा।
अमेरिका को कैसे भुगतनी पड़ सकती है कीमत?
- महंगाई का खतरा: अमेरिका की वर्तमान महंगाई दर 2.8% से बढ़कर 4.5% तक पहुंच सकती है।
- आर्थिक मंदी का जोखिम: ब्याज दरें कम न होने से उपभोक्ता खर्च घटेगा और आर्थिक विकास धीमा होगा। मंदी का खतरा 30-40% तक बढ़ सकता है।
- रोजगार पर असर: ऑटो और टेक्सटाइल जैसे आयात-निर्भर उद्योगों में नौकरियां कम हो सकती हैं।
भारत की तुलनात्मक स्थिति: फायदा या नुकसान?
- चीन के मुकाबले बेहतर: चीन पर34% टैरिफ के विपरीत, भारत पर 26% शुल्क से भारतीय उत्पाद अमेरिका में सस्ते रहेंगे।
- पड़ोसी देशों से बढ़त: बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका पर भी भारी टैरिफ से भारत को निर्यात में लाभ मिल सकता है।
- जीडीपी पर प्रभाव: एमके ग्लोबल की माधवी अरोड़ा के मुताबिक, भारत की जीडीपी पर 0.8-0.9% का असर होगा, जो एशियाई देशों से कम है।
क्या भारत करेगा जवाबी कार्रवाई?
भारत ने अब तक वार्ता का रास्ता चुना है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तटस्थता की नीति से मिले फायदे के अनुभव के बाद, सरकार अमेरिका के साथ समझौते पर ध्यान दे रही है। हालांकि, 30-33 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर असर की आशंका से कुछ क्षेत्रों में तनाव बना रहेगा।
भारत को कहां फायदा, कहां नुकसान?
फायदा:
- भारत की स्थिति अन्य निर्यातक देशों (चीन, वियतनाम, बांग्लादेश) से बेहतर है, क्योंकि उन पर ज्यादा टैरिफ लगाया गया है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते रहेंगे।
- फार्मास्यूटिकल, डिफेंस, और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को टैरिफ से छूट मिली है, जो भारत के लिए सकारात्मक है।
- लंबी अवधि में मुक्त व्यापार समझौते से भारत को राहत मिल सकती है।
नुकसान:
- आईटी, टेक्सटाइल, और कृषि जैसे सेक्टर्स पर असर पड़ेगा, क्योंकि इनकी कीमतें बढ़ने से निर्यात में कमी आ सकती है।
- उद्योगों की लागत बढ़ने से कॉरपोरेट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत को अल्पकालिक चुनौतियां मिलेंगी, लेकिन दीर्घकाल में एफटीए और चीन की तुलना में बेहतर प्रतिस्पर्धा से राहत मिल सकती है। वहीं, अमेरिका को महंगाई और आर्थिक मंदी की कीमत चुकानी पड़ सकती है