Wakf Board Act: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के अनुसार, मोदी सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में लगभग 40 बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार का मकसद इस कानून को पारदर्शी, समावेशी और व्यवस्थित बनाना है। आइए जानते हैं कि सरकार किन 5 प्रमुख वजहों से बदलाव लाना चाहती है?
1. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की एंट्री
नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड में अब दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल होंगे। इतना ही नहीं, बोर्ड के सीईओ का पद भी गैर-मुस्लिम के लिए खुला हो सकता है। यह कदम बोर्ड को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में उठाया जा रहा है।
2. महिला और अन्य मुस्लिम समुदाय का पार्टिसिपेशन बढ़ाना
कानून में संशोधन कर वक्फ बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। सेक्शन-9 और 14 में बदलाव के जरिए केंद्रीय वक्फ परिषद में दो महिलाओं को शामिल करने का प्रस्ताव है। साथ ही, बोहरा और आगाखानी मुस्लिम समुदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनाने की योजना है।
- बोहरा समुदाय: ये मुस्लिम आमतौर पर व्यवसाय से जुड़े होते हैं।
- आगाखानी समुदाय: ये इस्माइली मुसलमान हैं, जो न तो रोजा रखते हैं और न ही हज पर जाते हैं।
3. बोर्ड पर सरकार का कंट्रोल बढ़ाना
केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए यह कदम उठा रही है। गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों को मैनेजमेंट में शामिल करने और सरकारी अधिकारियों से ऑडिट कराने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) के जरिए वक्फ संपत्तियों का ऑडिट होगा, जिससे वित्तीय पारदर्शिता आएगी।
4. जिला मजिस्ट्रेट के ऑफिस में रजिस्ट्रेशन
सरकार ने जस्टिस सच्चर आयोग और के रहमान खान की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया है। नए नियमों के तहत वक्फ बोर्ड को अपनी संपत्ति जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में रजिस्टर्ड करानी होगी। इससे मालिकाना हक की जांच संभव होगी और संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
5. न्याय के लिए अदालत जाने का मौका
नए बिल में वक्फ ट्रिब्यूनल में दो सदस्य होंगे और उनके फैसले को 90 दिनों के अंदर हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। अभी तक अगर वक्फ किसी जमीन पर दावा करता है, तो दूसरे पक्ष को यह साबित करना पड़ता है कि जमीन उसकी है। नए कानून में इस “बर्डेन ऑफ प्रूफ” की समस्या का समाधान भी प्रस्तावित है।
मोदी सरकार का मानना है कि ये बदलाव वक्फ बोर्ड को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सभी समुदायों के लिए समावेशी बनाएंगे।
वक्फ संशोधन बिल को 2 अप्रैल को संसद में पेश किया जाएगा। सरकार पहले लोकसभा में बिल पेश करेगी। सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- हम संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। बिल पर संसद के बाहर खूब विचार-विमर्श हुए हैं। हमें सदन में बहस और चर्चा में भी जरूर भाग लेना चाहिए।
ये भी पढ़ें 👉:Uttarakhand: नवनियुक्त मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने किया पदभार ग्रहण
रिजिजू ने कहा- बिल पर बनी जेपीसी ने लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा परामर्श प्रक्रिया का रिकॉर्ड बनाया है। सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध है कि लोगों को गुमराह न करें।
उन्होंने कहा कि भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि सरकार मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है।