साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मरिया कोरीना मचादो को दिया गया है। नोबेल कमेटी ने कहा कि उन्हें यह सम्मान “वेनेज़ुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण संघर्ष” के लिए दिया गया है।
मचादो वर्तमान में वेनेज़ुएला में छिपकर रह रही हैं, लेकिन उनके प्रयासों को पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है। कमेटी ने कहा कि “गहराते अंधेरे में लोकतंत्र की लौ जलाए रखने” के लिए मचादो लैटिन अमेरिका में साहस की सबसे असाधारण मिसालों में से एक हैं।
नोबेल इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस्टियन बर्ग हर्पविकेन ने जब उन्हें यह खबर दी, तो उनकी आवाज़ भावुकता से भर गई। मचादो ने जवाब में कहा, “ओह माय गॉड… मेरे पास शब्द नहीं हैं। यह पूरे समाज की उपलब्धि है, मैं तो बस एक व्यक्ति हूं।”
ट्रंप को लेकर क्या कहा गया?
नोबेल शांति कमेटी से जब पूछा गया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर विचार हुआ या क्या उन पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव था, तो चेयरमैन योर्गेन वाटने फ़्रीडनेस ने कहा:
“हम अपना निर्णय केवल किए गए कार्य और अल्फ़्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार लेते हैं। बाहरी दबाव या मीडिया अभियानों का हमारे निर्णय पर कोई असर नहीं होता।”
बता दें कि ट्रंप कई बार खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का दावेदार बताते रहे हैं और उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने कई वैश्विक संघर्षों को शांत करवाने में भूमिका निभाई है।
कौन हैं मरिया कोरीना मचादो?
मरिया वेनेज़ुएला की प्रमुख विपक्षी नेता हैं। उन्हें बीते साल राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने से प्रतिबंधित कर दिया गया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।
उनके समर्थकों की भारी भीड़ अक्सर सड़कों पर दिखाई देती रही है। चुनाव परिणामों में अनियमितताओं के आरोप लगे और कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें सरकार ने कुचल दिया।
58 वर्षीय मचादो लोकतंत्र की बहाली के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं, और नोबेल शांति पुरस्कार को उन्होंने अपने देश के लोगों की जीत बताया है।
मचादो का बयान:
“यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि वेनेज़ुएला के हर नागरिक का है जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है।”
