Operation Trashi-I: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सोमवार को आतंकियों से हुई मुठभेड़ में बागेश्वर के कपकोट के बीथी निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया शहीद हो गए।
43 वर्षीय गजेंद्र सिंह गढ़िया भारतीय सेना की टू-पैरा कमांडो यूनिट में तैनात थे। वह किश्तवाड़ में आतंकियों की तलाश में चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ऑपरेशन त्राशी का हिस्सा थे। छात्रू क्षेत्र के सुदूर-सिंहपोरा में सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इसी हमले में हवलदार गजेंद्र बलिदान हो गए। वह अपने पीछे पिता धन सिंह गढि़या, माता चंद्रा देवी गढि़या, पत्नी लीला गढि़या और दो बच्चे राहुल गढि़या और धीरज गढि़या को छोड़ गए हैं। उनका छोटा भाई किशोर गढि़या है।
वहीं गजेंद्र सिंह की पत्नी बच्चों को पढ़ाने के लिए देहरादून में किराये के मकान में रह रही थी। उनके दोनों बेटे राहुल और धीरज कक्षा चार में पढ़ते हैं। पत्नी बार-बार बेसुध हो रही हैं. वहीं मासूम बच्चे अपने पिता को याद करके बार-बार रो रहे हैं।
2004 में हुए थे भर्ती
गजेंद्र ने प्राथमिक शिक्षा गांव के विद्यालय से प्राप्त की थी। छह से इंटर तक की पढ़ाई उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट से हासिल की। स्नातक पहले वर्ष के दौरान 2004 में वह सेना में भर्ती हो गए थे।
सीएम धामी ने जताया शोक
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद जवान को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा, ‘सैन्यभूमि उत्तराखण्ड के वीर सपूत, बागेश्वर जनपद निवासी हवलदार श्री गजेन्द्र सिंह गढ़िया जी का जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद होने का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ.श। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्री चरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों को यह असीम कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करें. ।।ॐ शांति।।’
