Pariksha Pe Charcha: पीएम मोदी का छात्रों को गुरुमंत्र, शिक्षा बोझ नहीं होनी चाहिए, लीडर बनना है तो पहले निडर बनो

Pariksha Pe Charcha 2026 Part 2: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चर्चित संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ 2026 का सोमवार को बहुप्रतीक्षित दूसरा एपिसोड रिलीज हुआ। परीक्षा की तैयारी की रणनीतियों, स्ट्रेस को मैनेज करने के तरीकों और परीक्षाओं के दौरान आने वाली चुनौतियों पर पीएम मोदी ने छात्रों के साथ चर्चा किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं कई वर्षों से 10वीं और 12वीं के बच्चों से बाच करता रहता हूं। मेरे लिए यह कार्यक्रम सीखने का कार्यक्रम है, सिखाने का नहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई और जुनून के बीच के अंतर को समझना चाहिए। अगर आपको कोई स्टार्ट-अप में रूचि है तो आप जरूर शुरू करें। इसके लिए उम्र कोई सीमा नहीं है। बता दें कि बातचीत के दौरान छात्रों ने ‘विकसित भारत’ का भी जिक्र किया।

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बातचीत के दौरान जब एक छात्र ने पीएम मोदी से पूछा कि 2047 विकसित भारत के लिए हम क्या कर सकते हैं? इस प्रश्न के जवाब में पीएम ने कहा कि मुझे अच्छा लगा कि मेरे देश के 10वीं 12वीं के छात्रों के मन में भी विकसित भारत की ड्रीम है। ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। आपने कभी सिंगापुर के बारे में सुना होगा। एक जमाने को वो देश कभी मछुआरों का देश था, जो आज इतना बड़ा बन गया। अगर हमें डेवलप कंट्री बनना है तो हमें अपनी आदतें भी ऐसी ही करनी होंगी। हमें थर्मल कंट्री की तरह नहीं करना कि कहीं पर भी कूड़ा कचरा फेंक दिया। कहीं पर भी थूक दिया। एक छोटी सी चीज है कि हम तय करेंगे कि हम खाने के बाद कुछ भी झूठा नहीं छोड़ेंगे। एक नागरिक के नाते अगर मैं इन चीजों का पालन करूं तो मैं विकसित भारत में अपना योगदान दे रहा हूं। मैं अपनी देश में बनीं चीजों को भी खरीदूं। अगर हम ऐसी छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखें तो विकसित भारत में अपना योगदान दे सकते हैं।

नेता का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं होता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दौरान छात्रों से बातचीत की। उन्होंने कहा, “नेता बनने के लिए पहल करने की मानसिकता विकसित करें। नेता का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं होता, बल्कि एक अच्छे नेता को अपने विचारों को स्पष्ट और प्रभावी ढंग से संप्रेषित करना आना चाहिए।”

बता दें कि पिछले कार्यक्रम में पीएम मोदी ने छात्रों से कहा था कि शिक्षा बोझ नहीं होनी चाहिए। कॉन्सेप्ट को सीखना और समझना जरूरी है। नंबर और मार्क्स सिर्फ कुछ समय के लिए होते हैं। जिंदगी की परीक्षा के लिए नहीं। हमारे जीवन में शिक्षा एक माध्यम है। खुद को एग्जामिन करने के लिए।