Uttarakhand: उत्तराखंड में वर्ष 2026 में प्रस्तावित एशिया की सबसे लंबी पैदल यात्रा श्री नंदादेवी राजजात 2027 में आयोजित की जाएगी, यात्रा को लेकर अभी तैयारियां पूरी नही हुई है जिस कारण नंदा देवी राजजात यात्रा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।
उत्तराखंड में हर 12 सालों में चमोली जिले के नौटी से आयोजित् होने वाली श्री नंदा देवी राजजात को लेकर राजजात समिति ने कर्णप्रयाग में आयोजित प्रेसवार्ता कर कहा कि यात्रा मार्ग पर अभी तैयारियां पूरी नही हो पायी है । क्योंकि नंदादेवी राजजात यात्रा को विभिन्न दुर्गम स्थानों से होकर गुजरना है । लेकिन अभी तक यात्रा को लेकर तैयारियां पूरी नही हो पायी है । जिस कारण राजजात यात्रा समिति ने यात्रा को वर्ष 2026 में स्थगित कर 2027 में यात्रा के आयोजन को लेकर निर्णय लिया है। जिसकी घोषणा मनोती कार्यक्रम के दिन की जाएगी।
बता दें कि नंदा देवी राजजात हर 12 साल में निकलने वाली लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा है. जिसकी अगुवाई चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू करता है.
इस यात्रा को ‘हिमालय का महाकुंभ’ भी कहा जाता है. मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है. यही खाडू यात्रा का अग्रदूत होता है, इसे मां नंदा का प्रतिनिधि माना जाता है. यह यात्रा चमोली के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड तक जाती है.
नंदा देवी राजजात यात्रा समिति के महासचिव भुवन नौटियाल ने कहा कि साल 2026 में प्रस्तावित राजजात यात्रा व्यवस्थागत दृष्टि से चिंताजनक थी. क्योंकि, राजजात यात्रा कभी भी ठीक 12 साल के अंतराल पर आयोजित नहीं हो पाई और विषम परिस्थितियों में यात्रा कराना जोखिमपूर्ण होता है।वहीं समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर ने कहा कि आगामी 23 जनवरी को नौटी में मनौती का कार्यक्रम विधिवत रूप से संपन्न किया जाएगा, लेकिन पंचांग के अनुसार, इस साल राजजात यात्रा 19 व 20 सितंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहुंचती. इस दौरान क्षेत्र में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की संभावना रहती है. इसके अलावा निर्जन पड़ावों पर अभी आवश्यक कार्य पूरे न होने के कारण यात्रा की सुरक्षा एवं व्यवस्थाएं चुनौतीपूर्ण हो सकती थी. इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सर्वसम्मति से राजजात यात्रा को 2026 के स्थान पर 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया है
