Uttarakhand: SIR और EVM को लेकर कांग्रेस पर बरसे सीएम धामी, राहुल गांधी पर साधा निशाना

Uttarakhand: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस पर एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मतदाता सूची में नाम बढ़ने की बात होती थी, तब कांग्रेस के नेता सवाल उठाते थे, लेकिन अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है तो इसका विरोध किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने ईवीएम को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार मिलने पर ईवीएम पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि जीत मिलने पर उसी व्यवस्था पर सवाल नहीं किए जाते।

 एसआईआर को लेकर कांग्रेस पर लगाए आरोप

सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस को एसआईआर प्रक्रिया पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि पहले मतदाता सूची में वोट बढ़ने की बात कही जा रही थी, तो अब सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रही है। हालांकि, इस संबंध में कांग्रेस का पक्ष और मुख्यमंत्री द्वारा संदर्भित पुराने बयानों का पूरा विवरण सामने होना जरूरी है, ताकि दोनों पक्षों की बात स्पष्ट हो सके।

ईवीएम पर भी कांग्रेस को घेरा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ईवीएम को लेकर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम पक्ष में न आने पर मशीनों पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हारने पर ईवीएम खराब बताई जाती है और जीतने पर अच्छी।सीएम धामी ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी को वर्ष 2014 से लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें अभी धैर्य बनाए रखना चाहिए।

Dhal Singh Bisen: उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जानिए उनका सियासी सफर

 राजनीतिक बयानबाजी के बीच एसआईआर पर बहस

एसआईआर और ईवीएम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस जारी है। मुख्यमंत्री धामी के बयान ने इस मुद्दे पर सियासी चर्चा को फिर तेज कर दिया है। एसआईआर के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता है, जबकि ईवीएम चुनाव में मतदान दर्ज करने की व्यवस्था है। इन दोनों विषयों पर राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयानों को सामने रखना महत्वपूर्ण है।