Chamoli: जिले के नारायणबगड़ विकासखंड में क्षेत्र पंचायत (BDC) की बैठक के दौरान ग्राम प्रधानों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर हंगामा किया। लंबे समय से लंबित 10 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्राम प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और ग्राम प्रधानों के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रधानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
मांगों पर सुनवाई नहीं होने से नाराज प्रधान
शुक्रवार को नारायणबगड़ में आयोजित क्षेत्र पंचायत की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई, जब प्रधान संघ अध्यक्ष योगेंद्र सिंह खत्री के नेतृत्व में ग्राम प्रधान अपनी मांगों को लेकर सदन से बाहर निकल गए। ग्राम प्रधानों का आरोप है कि वे लंबे समय से शासन-प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और ग्राम प्रधानों के बीच मांगों को लेकर तीखी बहस हुई। वहीं, ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने नाराज प्रधानों को मनाने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन प्रधान अपनी मांगों पर अड़े रहे।
ये हैं ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगें
ग्राम प्रधानों ने मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने, ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में शामिल होने वाले वार्ड सदस्यों को मानदेय देने और मनरेगा में ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई।
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इसके अलावा अकुशल श्रमिकों को 600 रुपये और कुशल श्रमिकों को 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने, राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि बढ़ाने तथा विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि बनाने की मांग भी शामिल है।
प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायतों से कराने, पंचायत राज अधिनियम के तहत 29 विभागों के अधिकार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने, जिला योजना में प्रधान संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करने और ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कराने की मांग भी रखी।
चुनाव बहिष्कार और आंदोलन की चेतावनी
ग्राम प्रधानों का कहना है कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है, लेकिन पर्याप्त मानदेय, वित्तीय अधिकार और संसाधन नहीं मिलने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक में हुए इस घटनाक्रम के बाद ग्राम प्रधानों की मांगों और शासन-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।
