अब ओवर स्पीड वाहनों पर लगेगी लगाम, पहली बार लगाए गए डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड 

Digital speed sign boards: सड़क दुर्घटना के मुख्य कारण ओवरस्पीड का विश्लेषण किया गया। इसके बाद प्रदेश में गतिसीमा के निर्धारण के लिए उपकरणों से गतिसीमा की चेतावनी के लिए प्रदेश में पहली बार डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड लगाए गए हैं।


उत्तराखंड में सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात निदेशालय की ओर से सड़कों पर डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इससे सड़क पर चलते समय वाहन स्वामी को उनकी गाड़ी की गति की सूचना मिलेगी। यातायात निदेशालय का मानना है कि इससे वाहन स्वामी बोर्ड में देखकर खुद अपनी स्पीड कम करेगा।

प्रदेश में पहली बार लगाए गए डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड

पुलिस महानिरीक्षक व निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन ने बताया कि सड़क दुर्घटना के मुख्य कारण ओवरस्पीड का विश्लेषण किया गया। इसके बाद प्रदेश में गतिसीमा के निर्धारण के लिए उपकरणों से गतिसीमा की चेतावनी के लिए प्रदेश में पहली बार हाईटेक गतिसीमा बोर्ड (डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड) लगाए गए हैं।

यहां लगे हैं डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड

यातायात निदेशालय की ओर से दून में तीन स्थानों पर स्पीड साइन बोर्ड लगाए गए हैं। जो हरिद्वार बाइपास पर नियल हिल्स अपार्टमेंट, राजपुर रोड पर होटल सनराइज, ईसी रोड पर सीएसडी डिपो आराघर के पास लगाए गए हैं। दून के अलावा हरिद्वार में तीन, ऊधम सिंह नगर में तीन और नैनीताल में एक बोर्ड लगाया गया है।

जानें कैसे काम करता है डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड

रडार स्पीड साइन बोर्ड गति सीमा का एक हाईटेक उपकरण होता है, जो चालक को वाहन की गति के बारे में सूचित करता है। यह साइन बोर्ड रडार तकनीक का उपयोग करता है, जो आगे आ रहे वाहनों की गति को मापने के लिए होती है। जब कोई वाहन इस साइन बोर्ड के पास से गुजरता है तो उसकी गति साइन बोर्ड पर प्रदर्शित हो जाती है। यदि गति सीमा 20 निर्धारित की गई है तो यह 20 तक पासिंग लाइट ग्रीन ब्लिंक करेगा और अगर 20 से ऊपर किसी वाहन की गति होगी तो यह लाल लाइट ब्लिंक करेगा। यह एक सुरक्षा उपाय के रूप में भी काम करता है, क्योंकि यह वाहन चालकों को अपनी गाड़ी की गति को निर्धारित गति में रहने के लिए प्रेरित करता है।

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स्पीड साइन बोर्ड को देखकर आएगा मनोवैज्ञानिक दबाव

पुलिस महानिरीक्षक व निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन ने बताया कि डिजिटल स्पीड साइन बोर्ड पर अपने वाहन की गति देखने के बाद वाहन चालकों पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव आएगा। इससे अगर उनके वाहन की रफ्तार अधिक होगी तो वह अपने वाहन की रफ्तार को खुद ही कम कर लेंगे। इसके साथ ही यदि किसी वाहन में बच्चे उस बोर्ड को देखेंगे तो वह अपने माता-पिता या चालक को बताएंगे कि आपके वाहन की गति अधिक है या कम, इससे बच्चे भी भविष्य के लिए गति-सीमा के पालन के लिए प्रेरित होंगे।