देहरादून। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक संस्था फोरगिवनेस फाउंडेशन सोसाइटी की ओर से आत्महत्या निषेध अभियान के तहत विश्व आत्महत्या निषेध जागरूकता दिवस पर एक निःशुल्क जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ताओं को आत्महत्या की प्रवृत्ति से जूझ रहे लोगों की पहचान करने, उन्हें समझने और समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए अधिक सक्षम बनाना रहा।
केदारपुरम, देहरादून में आयोजित कार्यशाला में प्रख्यात मनोवैज्ञानिक एवं समाजसेवी डॉ. पवन शर्मा (द साइकेडेलिक) ने प्रतिभागियों को आत्महत्या से जुड़े विभिन्न शोधों और मनोवैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने मनोवैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से प्रतिभागियों का कौशल विकास भी किया।

डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि आत्महत्या की भावना धीरे-धीरे व्यक्ति के मन पर हावी हो सकती है और गंभीर स्थिति में व्यक्ति अपना जीवन समाप्त करने का प्रयास कर सकता है। उन्होंने आत्महत्या से जुड़े वैश्विक और उत्तराखंड के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए इसे गंभीर सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य चुनौती बताया।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति से बचाव के लिए व्यक्ति को अकेलेपन से बचना, लोगों के साथ संवाद और मेलजोल बनाए रखना तथा डिजिटल जीवन की बजाय वास्तविक सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। इसके साथ ही अत्यधिक तनाव, उदासी और नशे जैसी स्थितियों से बचने तथा व्यस्त एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में आत्महत्या के पीछे लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, आर्थिक परेशानियां, रिश्तों में तनाव, असफल प्रेम संबंध और परीक्षा में असफल होने का डर जैसे विभिन्न कारणों पर भी चर्चा की गई।
डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जीवन से विरक्ति या अनिच्छा की बात करता है तो उसकी बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को बिना किसी निर्णय या आलोचना के धैर्यपूर्वक सुनना और उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी नकारात्मक भावनाओं और विचारों को खुलकर व्यक्त करने के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद माहौल दिया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि आत्मघाती विचारों से जूझ रहे व्यक्ति के लिए समय रहते किसी अनुभवी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना और उचित परामर्श एवं उपचार की व्यवस्था करना बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर मिलने वाली सहायता कई गंभीर परिस्थितियों को टालने में मदद कर सकती है।
फोरगिवनेस फाउंडेशन सोसाइटी की ओर से बताया गया कि संस्था ऐसे मामलों में निःशुल्क परामर्श एवं थेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराती है। संस्था ने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर समय रहते विशेषज्ञों की सहायता लेने की अपील की
