Uttarakhand: मसूरी के निकट जौनपुर क्षेत्र की अगलाड़ नदी में शनिवार को सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक मौण मेला पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। देश के इस अनोखे सामूहिक मछली पकड़ने के मेले में हजारों लोगों ने हिस्सा लेकर लोक संस्कृति और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की।
सदियों पुरानी परंपरा का साक्षी बना मौण मेला
यमुना की सहायक अगलाड़ नदी के तट पर आयोजित मौण मेले में इस वर्ष अठजुला क्षेत्र की ओर से मेले की कमान संभाली गई। परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने नदी में औषधीय टिमरू का पाउडर डाला, जिससे मछलियां कुछ समय के लिए बेहोश हो गईं। इसके बाद हजारों लोग टोकरियां और जाल लेकर नदी में उतर गए और सामूहिक रूप से मछलियां पकड़ीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टिमरू के पाउडर से मछलियां मरती नहीं हैं, बल्कि थोड़ी देर बाद सामान्य हो जाती हैं।
ढोल-दमाऊ की गूंज और पारंपरिक लोक संस्कृति के बीच आयोजित इस मेले में जौनपुर, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सदियों पुराना मौण मेला आज भी सामाजिक समरसता, सामूहिक सहभागिता और उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
