UK Board 2026: सितंबर 2025 की आपदा में माँ और दादा को खोया, स्कूल भी टूटा; पर 12वीं बोर्ड में 76% अंक लाकर दिवंगत माँ को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रिपोर्ट – सुरजीत सिंह बिष्ट
नन्दानगर (चमोली)। कहते हैं कि पहाड़ की बेटियां पहाड़ जैसी ही दृढ़ होती हैं। चमोली जिले के आपदा प्रभावित धुर्मा गाँव की नैना रावत ने इस बात को सच कर दिखाया है। आज जब उत्तराखंड बोर्ड के 12वीं के नतीजे घोषित हुए, तो नैना का नाम केवल एक रोल नंबर बनकर नहीं, बल्कि अटूट साहस के प्रतीक के रूप में उभरा है।

वह काली रात और उजड़ता आशियाना
आज से ठीक कुछ महीने पहले, सितंबर 2025 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने नैना की दुनिया उजाड़ दी थी। उस रात आए सैलाब ने नैना से उनकी माँ ममता रावत और उनके दादाजी को हमेशा के लिए छीन लिया। जिस घर में बचपन बीता था, वह मलबे में तब्दील हो गया और जिस विद्यालय में नैना सुनहरे भविष्य के सपने देखती थी, वह भी आपदा की भेंट चढ़ गया।

कलम को बनाया हथियार
किसी भी बच्चे के लिए सिर से माँ का साया उठना सबसे बड़ा मानसिक आघात होता है। लेकिन नैना ने टूटने के बजाय लड़ने का फैसला किया।
पिता विक्रम सिंह रावत एक होटल में मेहनत कर किसी तरह परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

कठिन विषय, सीमित संसाधन
बिना घर और संसाधनों के अभाव में नैना ने PCM (भौतिकी, रसायन, गणित) जैसे कठिन विषयों में अपनी मेहनत के दम पर 76% अंक प्राप्त किए।

सोशल मीडिया पर अब नैना के लिए समर्थन की लहर चल पड़ी है। उत्तराखंड की जनता और प्रबुद्ध नागरिक मुख्यमंत्री और उत्तराखंड सरकार से विनम्र अपील कर रहे हैं:
* नैना की इस असाधारण उपलब्धि को सरकारी स्तर पर सम्मानित किया जाए।
* उसकी उच्च शिक्षा के लिए विशेष आर्थिक पैकेज या स्कॉलरशिप की व्यवस्था की जाए।
* आपदा प्रभावित परिवारों के ऐसे मेधावी बच्चों के लिए एक सुरक्षित भविष्य का ढांचा तैयार हो।
नैना रावत की सफलता यह बताती है कि आपदाएं घर तोड़ सकती हैं, लेकिन हौसले नहीं। आज पूरा उत्तराखंड नैना की पीठ थपथपा रहा है और माँ नन्दा भगवती से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।
