Chamoli: विवाद के बीच सेतु बने चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में श्रद्धालुओं के साथ पैदल पूरी की 280 किलोमीटर की यात्रा 

रिपोर्ट – जितेंद्र नेगी

Chamoli: विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा का 23 सितंबर को मां नंदा की डोली के सिद्धपीठ नंदाधाम कुरुड़ पहुंचने और गर्भगृह में प्रवेश के साथ विधिवत समापन हुआ । 5 सितंबर को सिद्धपीठ नंदाधाम कुरुड़ से शुरू हुई यह ऐतिहासिक यात्रा करीब 280 किलोमीटर का कठिन और दुर्गम सफर तय करते हुए होमकुंड पहुंची।

इस धार्मिक यात्रा के दौरान जहां हजारों श्रद्धालु मां नंदा के जयकारों के साथ दुर्गम हिमालयी रास्तों पर आगे बढ़ते रहे, वहीं यात्रा के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में जनपद चमोली के जिला पंचायत अध्यक्ष श्री दौलत सिंह बिष्ट की भूमिका भी सामने आई।

यात्रा के दौरान आयोजन समिति और अन्य गांवों के मध्य कुछ विवादित विषयों को लेकर स्थिति उत्पन्न हुई। ऐसे समय में जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली दौलत सिंह बिष्ट ने दोनों पक्षों के बीच संवाद और सामंजस्य स्थापित करने में सेतु की भूमिका निभाई। उन्होंने आपसी मतभेदों को पीछे रखते हुए क्षेत्र की एकता, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता को प्राथमिकता देने का प्रयास किया।

उनकी इस भूमिका को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नंदा देवी बड़ी ज़ात यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में यात्रा के दौरान उत्पन्न मतभेदों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास यात्रा की मूल भावना—सामूहिकता और श्रद्धा—के अनुरूप रहा।

संवैधानिक पद पर रहते हुए श्रद्धालुओं के साथ पैदल चले अध्यक्ष

जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व वाले पद पर होने के बावजूद दौलत सिंह बिष्ट ने यात्रा को केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के साथ पैदल चलकर पूरा किया। उन्होंने चौसिंग्या खाडू के साथ मां नंदा की इस ऐतिहासिक यात्रा में सहभागिता की और कठिन एवं दुर्गम पड़ावों से होते हुए होमकुंड तक पहुंचे।

बर्फीली चट्टानों, कठिन पहाड़ी रास्तों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच वे अन्य यात्रियों और श्रद्धालुओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। यात्रा के दौरान उनकी यह सहभागिता क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं के लिए भी चर्चा का विषय बनी।

280 किलोमीटर की कठिन यात्रा में निभाई सहभागिता

5 सितंबर को नंदाधाम कुरुड़ से प्रारंभ हुई यह यात्रा विभिन्न दुर्गम पड़ावों से होकर आगे बढ़ी और अंततः हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित होमकुंड पहुंची, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

इस पूरी यात्रा में जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट की पैदल सहभागिता को उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों द्वारा मां नंदा के प्रति आस्था और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति समर्पण के रूप में देखा जा रहा है।

यात्रा के दौरान विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य बनाने और दूसरी ओर स्वयं श्रद्धालुओं के साथ कठिन यात्रा में शामिल रहने की उनकी भूमिका ने उन्हें इस राजजात यात्रा के दौरान एक अलग पहचान दी।

23 सितंबर को अपने धाम पहुंचीं मां नंदा

लगभग 280 किलोमीटर की इस ऐतिहासिक यात्रा के विभिन्न पड़ावों को पार करने के बाद 23 सितंबर को मां नंदा की डोली पुनः अपने सिद्धपीठ नंदाधाम कुरुड़ पहुंची, जहां विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां नंदा की डोली ने गर्भगृह में प्रवेश किया।

इसके साथ ही कई दिनों से चल रही इस ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा का समापन हुआ।

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यह यात्रा केवल पहाड़ों की दुर्गम चोटियों को पार करने वाली धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, संस्कृति, सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता की यात्रा भी है।

इस पूरी यात्रा के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट द्वारा विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास और स्वयं श्रद्धालुओं के साथ पैदल चलकर कठिन यात्रा में सहभागिता करना, नंदा देवी राजजात की इसी एकता और सामूहिकता की भावना को मजबूत करने वाला प्रसंग बनकर सामने आया।