Chamoli: नंदादेवी के धर्म रक्षक ‘तातड़ा ध्यों सिंह भूम्याळ’ के मुख्य पश्वा मेहरबान सिंह पंवार का निधन, नंदाकिनी घाटी में शोक की लहर

Chamoli: जनपद के सीमांत गांव सुतोल और संपूर्ण नंदाकिनी घाटी में आज शोक की लहर दौड़ गई। विश्व प्रसिद्ध श्री नंदा देवी राजजात यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले *तातड़ा ध्यों सिंह भूम्याळ देवता* (मां नंदा देवी के धर्म रक्षक भाई) के मुख्य पश्वा और सुतोल गांव के पदान मेहरबान सिंह पंवार का आज देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया है।

श्री महरबान सिंह पंवार केवल एक ग्रामीण जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के संरक्षक भी थे। वे तातड़ा ध्यों सिंह भूम्याळ देवता के मुख्य पश्वा थे।

इस मंदिर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के गर्भगृह में केवल मुख्य पश्वा को ही प्रवेश और पूजा-अर्चना का अधिकार प्राप्त है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ध्यों सिंह देवता को मां नंदा देवी का धर्म रक्षक भाई माना जाता है।

एशिया की सबसे लंबी पैदल यात्रा ‘नंदा देवी ठुलीजात’ के सफल संचालन और सुरक्षा में इस देव शक्ति की मुख्य भूमिका रहती है।

 पौराणिक और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र

रूप गंगा और नंदाकिनी नदी घाटी के संगम पर बसा सुतोल गांव अपनी पौराणिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। मेहरबान सिंह जी के निधन से इस घाटी ने एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है जो परंपराओं और आधुनिक समाज के बीच एक सेतु की तरह कार्य करते थे।

 

मेहरबान सिंह पंवार के निधन की खबर मिलते ही सुतोल सहित दशोली और घाट ब्लॉक के ऊपरी क्षेत्रों में मातम पसर गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने न केवल अपना ग्राम पधान खोया है, बल्कि अपनी समृद्ध देव-परंपरा का एक सशक्त प्रहरी भी खो दिया है।

 

“मेहरबान सिंह जी का जाना नंदा देवी की देव-संस्कृति के लिए एक युग का अंत है। ध्यों देवता के पश्वा के रूप में उनकी निष्ठा और सेवा को सदैव याद रखा जाएगा।” — *स्थानीय निवासी*