Champawat: जनपद में पिछले दो दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चाओं का केंद्र बने कथित नाबालिग गैंगरेप मामले का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई थी और कांग्रेस द्वारा कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे।
एसपी चंपावत ने किया खुलासा
गुरुवार को प्रेस वार्ता करते हुए एसपी रेखा यादव ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मामले में नाबालिग के साथ किसी भी प्रकार की दुष्कर्म की घटना नहीं हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला बदले की भावना से प्रेरित होकर रची गई साजिश थी।
एसपी के अनुसार, कमल रावत नामक व्यक्ति ने अपनी महिला मित्र के साथ मिलकर इस घटनाक्रम की योजना बनाई थी। नाबालिग को उसके पिता के इलाज का लालच देकर इस साजिश में शामिल किया गया।
शिकायत के बाद गठित हुई थी SIT
एसपी चंपावत ने बताया 6 मई 2026 को पीड़िता के पिता ने कोतवाली चंपावत में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री के साथ तीन लोगों ने दुष्कर्म किया है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया और आरएफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया।
मेडिकल और तकनीकी जांच में नहीं मिले दुष्कर्म के संकेत
जांच में सामने आया कि पीड़िता घटना वाले दिन अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ ग्राम सल्ली में विवाह समारोह में गई थी। पुलिस जांच में पीड़िता की गतिविधियों को सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए सत्यापित किया गया।
मेडिकल परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या अंदरूनी चोट, संघर्ष या जबरदस्ती के संकेत नहीं मिले। वहीं नामजद आरोपियों की घटनास्थल पर मौजूदगी भी तकनीकी साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं हो सकी।
पंचायत चुनाव की रंजिश में रची गई साजिश
एसपी रेखा यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि पंचायत चुनाव में हार का बदला लेने की भावना से इस कथित साजिश को अंजाम दिया गया। पीड़िता के द्वारा भी पूछताछ में बताया गया कमल रावत के द्वारा पिता के इलाज का प्रलोभन देकर उसे इस साजिश में शामिल किया गया था।
उन्होंने बताया कि कमल रावत पर पहले भी नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप लग चुके हैं। मामले में पुलिस द्वारा डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच अभी जारी है। मामले में शामिल संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ पुलिस के द्वारा की जा रही है।
CMO ने भी मेडिकल रिपोर्ट का किया जिक्र
डॉ. देवेश चौहान ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। पीड़िता के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान भी नहीं पाए गए।
खुलासे के बाद प्रशासन ने ली राहत की सांस
मामला मुख्यमंत्री की विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण पूरे प्रदेश में सुर्खियों में बना हुआ था। पुलिस खुलासे के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने राहत की सांस ली है। वहीं मामले के सामने आने के बाद लोग इस प्रकार की कथित साजिश को लेकर आश्चर्य जता रहे हैं।
झूठे आरोपों पर भी होगी कार्रवाई
चंपावत पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड पुलिस महिला और बाल अपराधों के प्रति Zero Tolerance की नीति अपनाती है। साथ ही यदि जांच में किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या मनगढ़ंत आरोप सामने आते हैं, तो संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
पुलिस ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रसारण और प्रकाशन किया जाए।
