Dehradun: उत्तराखण्ड में भूकंप के प्रति आमजन को जागरूक करने और राज्य में स्थापित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को परखने के उद्देश्य से आज पूर्वाह्न 11 बजे सायरन बजाकर परीक्षण किया गया। इस दौरान राज्य में स्थापित 112 सायरन पर अलर्ट प्राप्त हुआ। इसके साथ ही भूदेव मोबाइल ऐप पर भी परीक्षण चेतावनी प्राप्त हुई। इस माॅक ड्रिल के माध्यम से भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत स्थापित सायरन और सेंसर का परीक्षण किया गया। बता दें कि मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रत्येक माह की 09 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे परीक्षण करने के लिए सायरन बजाने के निर्देश दिए हैं।
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परीक्षण के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) में उपस्थित रहे और माॅक ड्रिल की निगरानी की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के वैज्ञानिक ऑनलाइन माध्यम से एसईओसी से जुड़े रहे और परीक्षण की प्रक्रिया की निगरानी की। इस दौरान सायरन की कार्यप्रणाली तथा मोबाइल ऐप पर प्राप्त चेतावनी का अवलोकन किया गया, ताकि प्रणाली की स्थिति का आकलन किया जा सके।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का परीक्षण काफी हद तक सफल रहा है। इस दौरान जिन स्थानों पर सायरन के संचालन में तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं, उन्हें आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा चिन्हित किया जा रहा है। संबंधित कमियों का आकलन कर उन्हें दूर कराया जाएगा, ताकि सभी सायरन आवश्यकतानुसार प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
सुमन ने बताया कि वर्तमान में राज्य में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और समय रहते चेतावनी प्रसारित करने की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। सायरन का नियमित परीक्षण इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यकता पड़ने पर लोगों तक चेतावनी पहुंचाने में कोई तकनीकी बाधा न आए। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे अपने मोबाइल फोन में भूदेव ऐप का अद्यतन संस्करण इंस्टॉल रखें और ऐप को लोकेशन की अनुमति प्रदान करें, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में चेतावनी संदेश प्राप्त करने में सुविधा हो।
